रविवार, 26 मई 2024

सोच


पिता रामेश अपने बेटे रघु के साथ पांचसितारा होटल में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम अटेंड करके कार से वापस जा रहे थे। होटल की भव्यता और कार्यक्रम की सफलता के बाद, दोनों ने कार में बैठकर अपनी यात्रा शुरू की। जैसे ही वे मुख्य सड़क पर पहुंचे, रास्ते में ट्रेफिक पुलिस का हवलदार मितेश ने उनकी कार को रोकने का इशारा करता दिखाई दिया। पिता रामेश ने कार धीमी की और हवलदार मितेश के पास जाकर रुक गए।
हवलदार मितेश ने देखा कि पिता रामेश ने सीट बैल्ट नहीं लगाई थी। उसने गंभीर स्वर में रामेश जी से कहा, "आपने सीट बैल्ट क्यों नहीं लगाई? यह नियमों का उल्लंघन है और आपके जीवन के लिए खतरनाक भी।" हवलदार की बात सुनकर पिता ने अपना परिचय दिया, "मैं सचिवालय में एक उच्च अधिकारी हूं। मुझे पता है क्या जरुरी है और क्या नहीं।"

बुधवार, 22 मई 2024

एक नई शुरुआत


अनाथालय की चार दीवारी के भीतर का जीवन किसी कैद से कम नहीं था। हर दिन एक नया संघर्ष और हर रात एक नई दहशत। लेकिन एक रात, जब सब सो रहे थे, रूपा ने हिम्मत जुटाई और अनाथालय की दहशत से भाग निकली। भागते-भागते, अंधेरी गलियों से गुजरते हुए, वह आधी रात को एक ऐसी जगह पहुंची जो उसके लिए अनजान और असुरक्षित थी। वहां, एक खंभे की लाइट जल रही थी और उसी के नीचे, रूपा डरी-सहमी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी। 

मंगलवार, 7 मई 2024

दिवाने मन का विकल्प



रोनिता और प्रदीप की शादी के 14 बरस से भी ज्यादा समय बीत चुके थे| इतने समय में दोनों ही 02 बच्चों के माता-पिता बनकर सामान्य तरीके से अपने जीवन की गाड़ी को ठीक तरीके से चला रहे थे| किन्तु, विगत कुछ दिनों से प्रदीप कुछ ज्यादा ही व्यस्त होने लगे थे यहाँ तक की रविवार के दिन भी| आज पूरे दिन बारिश होती रही थी| अभी थोड़ी देर पहले ही आसमान से पानी बरसना बंद हुआ था, लेकिन तेज हवा की सरसराहट अब भी सुनाई पड़ रही थी जो माहौल को रोमांटिक बनाने के लिए काफी थी|

शुक्रवार, 22 मार्च 2024

मानसिक स्वास्थ्य का महत्व



राजोपुर गाँव में रहने वाले सेठ गुड्डू लाला एक सफल व्यापारी थे| उनका जड़ी-बूटी का अपना व्यापार था जो देश-विदेश तक में फैला हुआ था| युवावस्था में शादी होने के लंबे अंतराल के बाद उन्हें एक लड़का हुआ जिसका नाम विक्रम रखा। विक्रम अपने जन्म के समय से हीं बहुत ही ब्रिलियंट और प्रतिभाशाली था। वह हमेशा ही सभी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी रहा करता था। उसने स्कूल में साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया, और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित होता रहा। उसने अपने लिए जो उद्देश्य तय किया हुआ था उसकी उच्च शिक्षा की योजना से अपेक्षाएं भी सभी को चौंका देती थी।

शनिवार, 16 मार्च 2024

प्यार की यात्रा


एक बार की बात है, एक बड़े शहर में, जहाँ गलियों की भीड़ में भटकती हुई तारों की तरह कई कहानियाँ बसी होती हैं। इस शहर के एक बड़े अफ़सोस के साथ, एक प्यार की कहानी भी जुड़ी थी। वहाँ एक लड़का था, जिसका नाम आर्यन था। वह शहर का एक उच्च वर्गीय परिवार से था। उसकी हर ख्वाहिश को पूरा करने की आदत थी, लेकिन उसकी आँखों में वह एक खोखलापन महसूस करता था, जैसे कुछ अधूरा सा है।

शुक्रवार, 15 मार्च 2024

अनूठी मोहब्बत



विक्रम और आयुषी की कहानी राजोपुर गाँव की एक छोटी सी गली में शुरू होती है, जहां विक्रम अपने माता-पिता के साथ अपने छोटे से घर में रहता है। वह एक साधारण गरीब लड़का है, जो अपने सपनों के पीछे भाग रहा है। उसके माता-पिता की साथी मेहनत और उनका सहारा उसे उसके लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है। उसके पास कोई धन नहीं था, लेकिन उसकी आत्मा में एक अलग ही जोश और उम्मीद थी। वह हमेशा अपने माता-पिता की मदद करते हुए अपने सुनहरे भविष्य के बारे में सोचता रहता था|

रविवार, 10 मार्च 2024

गुस्से में छिपा प्यार



आरव और रुचिका शादी से पहले एक अच्छे दोस्त और शादी के बाद एक आदर्श पति-पत्नी थे| दोनों ही एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे| अभी उनकी शादी को केवल 05 ही साल हुए थे और दोनों में अन-बन शुरू हो गई थी| इसका कारण आरव का पढ़ाई के प्रति ज्यादा लगाव बढ़ना था| आरव जल्दी से अपनी पढ़ाई पूरी करके एक बड़ी फैक्ट्री लगाना चाहता था| वह यह भी चाहता था कि रुचिका उसकी मालकिन बने|
विगत तीन दिनों से आरव और रुचिका की बातचीत बंद थी और घर का माहौल तनाव भरा था| कल की रात, आरव ने खुशी से अपनी पत्नी रुचिका के लिए एक साड़ी लाई थी। वह उसे टेबल पर रखकर सो गया। रुचिका ने उसे देखा था, लेकिन उस वक्त उसने उसे छूने का साहस नहीं किया था। अगले सुबह, रुचिका जब घर की सफाई कर रही थी, टेबल पर रखी साड़ी के पास एक चिट्ठी देखी। वह जल्दी से चिट्ठी को उठाकर पढ़ने लगी। उसमें लिखा था:
"मेरी प्यारी रुचिका,  गुस्से में देखकर तुम्हें एक अजीब सा सुख मिलता है, क्योंकि मुझे लगता है कि मैं घर थोड़ी देर से लौटू तो तुम ज्यादा गुस्सा नहीं करती हो, लेकिन जब मैं देर से घर लौटता हूँ तो तुम मुझे डाँटती हो, और मुझे वो डाँटना बहुत अच्छा लगता है। मुझे चाहिए कि मैं तुम्हें अपनी बाहों में लपेट लूं, लेकिन मैं इतना रोमांटिक नहीं हूं, मैं बस पढ़ाई और काम में इतना व्यस्त हूं कि मैं तुम्हें ठीक से ध्यान नहीं दे पाता।
मुझे यह तो पता नहीं कि तुम मुझे किस अनजान कारण से इतना प्यार करती हो, लेकिन जो भी हो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मैं सुबह जल्दी उठता हूं ताकि मैं सूर्य को देख सकूं, मुझे रोशनी पसंद नहीं, लेकिन मैं रोशनी के बिना तुम्हें नहीं देख सकता, इसलिए मैं हमेशा रोशनी के सामने अपना सिर झुकाता हूं। खैर, छोड़ो इस सब बातों को, कल मैंने तुम्हारे लिए एक साड़ी लाई थी, जिसे मैंने तुम्हें नहीं दिया, क्योंकि यह तुम्हें पसंद नहीं आई थी, लेकिन अब जब तुम इस चिट्ठी को पढ़ोगी, तो मैं जानता हूं कि तुम वो साड़ी अपने हाथों में लोगी।"
आरव की चिट्ठी पढ़कर, रुचिका के होठों पर हल्की मुस्कान खिल उठी और आंखों ने भी बरसने की असफल कोशिश की। उसने आरव के पत्र को दुबारा से और ठीक से पढ़ा। उसे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उसे आरव पर कहीं अपने से अधिक भरोसा था।
पत्र पढ़ने के बाद वह सोचने लगी कि, क्या आरव वास्तव में इतना रोमांटिक है जैसा कि वह सपनों में सोचती थी? शायद आरव का प्यार उसके अंदर छुपा हुआ था। रुचिका को आरव की चिट्ठी को पढ़कर साड़ी पहनने की इच्छा होने लगी और उसने साड़ी पहन भी ली। थोड़ी देर बाद दरवाजे पर खटखटाने की आवाज आई।
रुचिका ने जल्दी से दरवाजा खोला। आरव ने रुचिका को साड़ी में देखकर हैरानी जताई, लेकिन फिर उसने समझ लिया कि वह सही दरवाजे पर है। उसने रुचिका को बड़े ध्यान से देखा, और फिर अपने घर के अंदर चला गया। रुचिका को लगा कि, आरव को जैसे हर दिन उसी हालत में देखने की आदत हो गई है। वह नहीं समझ पा रही थी कि उसने उसे चाहकर भी पहले क्यों नहीं समझा।
डेली रूटीन के तहत आरव खाना खाकर अपने बिस्तर पर लेट गया। फिर दुबारा से रुचिका के द्वारा दरवाजा खटखटाया गया। अब आरव ने भी समझ लिया कि रुचिका ही आई है। रुचिका के अंदर आते ही, आरव ने उसे तिरछी नजरों से देखा, और समझा कि कुछ गलती हुई है। रुचिका कमरे में आकर चुपचाप बैठ गई। उसने बार-बार अपने आप को देखा और नजरे चुराकर बीच बीच में कभी कभी आरव को देखती रही कि क्या कुछ गड़बड़ हो गया है।
कुछ देर तक बैठने और कमरे में अन्य काम करने के बाद, जब काम पूरा हो गया, उसने आरव से जाने की इजाजत ली। इस तरह यहाँ से उन दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई| इसतरह से बातचीत के दौरान रुचिका ने आरव के प्रति अपना अन्याय बताया और उसने उसे अपनी बाहों में ले लिया।
आरव ने भी मन ही मन लगभग तैयार ही बैठा था और बस रुचिका की एक पहल का इंतजार कर रहा था| उसने तुरंत ही रुचिका को धीरे से अपनी बाहों में लिया और उसे गले लगा लिया। हालांकि रुचिका को यह सब अचानक लगा, लेकिन उसे बहुत अच्छा भी महसूस हो रहा था। आरव की दिल से निकली हुई इस भावना को देखकर, रुचिका का दिल भी खुशी से भर गया।
रुचिका ने भी आरव को अपनी बाहों में कस लिया और उसको गहरी चुम्बनों से भर दिया। आरव ने उसे भी गले लगा लिया और उन्होंने मिलकर दोनों प्यार का आनंद लिया, बिना किसी शब्द के। इस रोमांटिक क्षण के बाद, आरव ने कामरे की लाइट बंद की और उन दोनों ने एक-दूसरे के साथ बिताए हुए पलों का प्यार में डूबकरआनंद लिया।

सोच

पिता रामेश अपने बेटे रघु के साथ पांचसितारा होटल में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम अटेंड करके कार से वापस जा रहे थे। होटल की भव्यता और कार्यक्रम ...